बलिया दुर्गा पंडाल विवाद : थाना प्रभारी पर लाठीचार्ज और अभद्रता के आरोप, धरने के बाद हटाए गए

बलिया दुर्गा पंडाल विवाद के दौरान पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए

बलिया दुर्गा पंडाल विवाद : घटना की शुरुआत

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जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के बलिया दुर्गा पंडाल विवाद ने मंगलवार रात अचानक तूल पकड़ लिया। बलिया जिले के बिल्थरा रोड कस्बे में इंडियन क्लब के पास बने दुर्गा पंडाल के पास दो मोटरसाइकिलों की टक्कर हो गई। यह एक सामान्य सड़क हादसा था, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पूरे क्षेत्र में तनाव फैला दिया।

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जैसे ही हादसे की सूचना पुलिस को दी गई, उभांव थाने के प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद सिंह मौके पर पहुंचे। आरोप है कि थाना प्रभारी ने स्थिति संभालने के बजाय वहां मौजूद लोगों पर बिना किसी कारण लाठीचार्ज कर दिया। यही नहीं, उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ अभद्रता भी की।

बलिया दुर्गा पंडाल विवाद – लोगों का आक्रोश

बलिया दुर्गा पंडाल विवाद के बाद माहौल बिगड़ गया। दुर्गा पूजा समितियों और इंडियन क्लब के सदस्यों ने थाना प्रभारी की कार्रवाई पर गुस्सा जाहिर किया। आक्रोशित लोगों ने पंडाल में ही धरना शुरू कर दिया।

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धरना प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पंडाल की प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग सिस्टम) बंद कर दी। इससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। लगभग पांच घंटे तक यह धरना चलता रहा। पूजा स्थल पर अंधेरा छा गया और सैकड़ों लोग विरोध में डटे रहे।

पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी और वार्ता

जैसे ही मामला बिगड़ता गया, बलिया दुर्गा पंडाल विवाद की जानकारी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) दिनेश कुमार शुक्ला और रसड़ा के पुलिस उपाधीक्षक आलोक गुप्ता मौके पर पहुंचे।

उन्होंने धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत शुरू की। प्रदर्शनकारियों ने साफ मांग रखी कि थाना प्रभारी को तुरंत हटाया जाए और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए।

बलिया दुर्गा पंडाल विवाद – कार्रवाई और नया थाना प्रभारी

लगातार वार्ता और जनता के दबाव के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। बुधवार तड़के बलिया दुर्गा पंडाल विवाद को शांत करने के लिए उभांव थाने के प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद सिंह को हटा दिया गया।

उनकी जगह संजय शुक्ला को नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया। साथ ही, इस पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी रसड़ा के पुलिस उपाधीक्षक आलोक गुप्ता को सौंपी गई।

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पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने स्वयं इसकी पुष्टि की और कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।

बलिया दुर्गा पंडाल विवाद – जनता में रोष

इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच पुलिस प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष पैदा कर दिया। जनता का कहना था कि पूजा के माहौल में इस तरह की कार्रवाई से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

हालांकि, थाना प्रभारी को हटाए जाने के बाद धरना समाप्त हो गया और स्थिति सामान्य होने लगी। फिर भी, लोग अभी भी इस बात को लेकर सतर्क हैं कि जांच किस दिशा में जाएगी।

क्यों बड़ा मुद्दा बना बलिया दुर्गा पंडाल विवाद?

यह विवाद सिर्फ एक सड़क हादसे से शुरू हुआ था।

पुलिस की कथित लाठीचार्ज और अभद्रता ने आग में घी डालने का काम किया।

पूजा स्थल पर पांच घंटे तक प्रकाश व्यवस्था बंद रहने से धार्मिक माहौल बिगड़ा।

धरना प्रदर्शन ने प्रशासन को कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया।

बलिया दुर्गा पंडाल विवाद – स्थानीय नजरिया

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे मौके पर संवेदनशील होना चाहिए। अगर थाना प्रभारी धैर्य से काम लेते तो मामला बढ़ता ही नहीं।

पूजा समिति के सदस्य बोले कि दुर्गा पूजा जैसे पावन अवसर पर पुलिस का यह रवैया अस्वीकार्य है। उनका मानना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए पुलिस को प्रशिक्षण और दिशा-निर्देश देने की आवश्यकता है।

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प्रशासन की चुनौती

हालांकि, बलिया दुर्गा पंडाल विवाद फिलहाल शांत हो गया है, लेकिन प्रशासन के सामने अभी भी बड़ी चुनौती है। जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, तभी लोगों का भरोसा वापस लौटेगा।

यदि जांच में लापरवाही होती है, तो जनता का आक्रोश दोबारा भड़क सकता है। इसीलिए, रसड़ा के सीओ आलोक गुप्ता पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

बलिया दुर्गा पंडाल विवाद ने यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस का गलत रवैया एक छोटे से हादसे को बड़े आंदोलन में बदल सकता है।

धरना-प्रदर्शन, लाठीचार्ज और पंडाल की लाइटिंग बंद होने जैसी घटनाओं ने माहौल को और ज्यादा गंभीर बना दिया। फिलहाल, थाना प्रभारी को हटाकर नया अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या जांच के बाद दोषियों को सज़ा मिलेगी?

स्थानीय जनता अब यही उम्मीद कर रही है कि प्रशासन इस विवाद से सबक ले और आने वाले दिनों में दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करे।

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