सड़क बनी तालाब—डीग जिले के कामां क्षेत्र में स्थित जुरहरा रोड पर जलभराव की पुरानी समस्या एक बार फिर गंभीर रूप में सामने आ गई है। गांव कलावटा के पास सड़क पर बने गहरे गड्ढों में बारिश और घरों से निकला पानी जमा हो जाने के कारण आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि रोजमर्रा की आवाजाही जोखिम भरी हो चुकी है और राहगीरों को मजबूरी में पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।
जुरहरा रोड पर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से सड़क पर लगातार जलभराव बना हुआ है। करीब 40 गांवों को जोड़ने वाला यह मार्ग बारिश के बाद तालाब में तब्दील हो जाता है, जिससे स्थानीय लोगों, ब्रज यात्रियों और हरियाणा आने-जाने वाले राहगीरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बारिश के बाद और बिगड़ जाते हैं हालात
बारिश होते ही सड़क पर हालात तेजी से बिगड़ जाते हैं। गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क और जलाशय में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर पानी इतना भर जाता है कि सड़क का अंदाजा तक नहीं लग पाता। इससे वाहन चालकों को धीमी गति से चलना पड़ता है, फिर भी हादसों का खतरा बना रहता है।
दुपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा प्रभावित
जलभराव की इस समस्या से सबसे अधिक दुपहिया वाहन चालक प्रभावित हो रहे हैं। पानी से भरे गड्ढों में गिरने से कई लोग चोटिल हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन कोई न कोई वाहन फिसल जाता है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
40 गांवों का संपर्क मार्ग, फिर भी अनदेखी
यह सड़क केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े करीब 40 गांवों के लोगों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। इसके अलावा हरियाणा राज्य में आने-जाने वाले वाहन भी इसी सड़क का उपयोग करते हैं। बावजूद इसके, सड़क की दुर्दशा और जलभराव की समस्या को लेकर लंबे समय से अनदेखी की जा रही है।
घर-घर से निकलता पानी भी बढ़ा रहा संकट
स्थानीय निवासियों के अनुसार सड़क किनारे नालियों का निर्माण न होने से घरों से निकलने वाला पानी भी सड़क पर ही जमा हो जाता है। बारिश का पानी और घरेलू जल एक साथ सड़क पर भर जाने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। कई दिनों तक पानी जमा रहने से सड़क की सतह कमजोर हो रही है और गड्ढे लगातार गहरे होते जा रहे हैं।
शिकायतें हुईं, समाधान अब तक नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव की समस्या को लेकर कई बार पीडब्ल्यूडी विभाग और उच्च अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। मौखिक और लिखित दोनों तरह की शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। लोगों का आरोप है कि केवल आश्वासन दिए जाते हैं, जमीनी स्तर पर काम नहीं होता।
आवागमन के साथ बढ़ता हादसों का खतरा
जलभराव के कारण लोगों को मजबूरी में पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इससे फिसलने, वाहन अनियंत्रित होने और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, जब गड्ढे दिखाई नहीं देते।
नाली निर्माण से मिल सकती है स्थायी राहत
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सड़क के दोनों ओर समुचित नाली निर्माण करा दिया जाए, तो बारिश और घरों से निकला पानी आसानी से नालियों में चला जाएगा। इससे सड़क पर जलभराव नहीं होगा और आवागमन भी सुचारू हो सकेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द नाली निर्माण और सड़क मरम्मत की मांग की है।
लापरवाही से बढ़ता जनआक्रोश
लगातार बनी समस्या और प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। यह सड़क क्षेत्र की जीवनरेखा है और इसकी अनदेखी सीधे जनता की परेशानियों को बढ़ा रही है।
निष्कर्ष: समस्या पुरानी, समाधान की जरूरत तात्कालिक
सड़क पर जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन हर बारिश के साथ यह और विकराल रूप ले लेती है। नाली निर्माण और सड़क सुधार जैसे बुनियादी कार्यों के बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग और प्रशासन जनहित को प्राथमिकता देते हुए तत्काल ठोस कदम उठाए।








