कट्टम कांजीवरम साड़ी और देश का नौवां बजट—ये दोनों विषय इस बार एक साथ राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बने। संसद में जब केंद्रीय वित्त मंत्री
निर्मला सीतारमण
ने बजट 2026-27 प्रस्तुत किया, तो जहां एक ओर उनकी घोषणाओं पर देश की निगाहें टिकी थीं, वहीं दूसरी ओर उनकी पारंपरिक कट्टम कांजीवरम साड़ी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। सादगी, भारतीयता और सांस्कृतिक निरंतरता का यह प्रतीक एक बार फिर यह बताने में सफल रहा कि सत्ता के उच्चतम मंच पर भी विरासत की गरिमा कितनी सहजता से निभाई जा सकती है।
कट्टम कांजीवरम साड़ी में संसद पहुंचीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश किया। बजट की आर्थिक घोषणाओं के साथ-साथ उनका पारंपरिक पहनावा भी चर्चा में रहा, जिसने भारतीय संस्कृति, सादगी और नीति की स्थिरता को एक साथ रेखांकित किया।
लगातार नौवीं बार बजट और स्थिर नेतृत्व का संकेत
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह नौवां बजट केवल एक आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं था, बल्कि यह सरकार की निरंतरता और नीति-स्थिरता का भी संकेतक रहा। पिछले आठ वर्षों से बजट पेश कर रहीं सीतारमण ने इस बार भी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक दिशा को संतुलित और समावेशी बताया। उन्होंने साफ कहा कि व्यापारिक तनाव, आपूर्ति शृंखला की बाधाएं और तकनीकी बदलावों के बावजूद भारत आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
कट्टम कांजीवरम साड़ी : परंपरा का 500 साल पुराना ताना-बाना
जिस कट्टम कांजीवरम साड़ी में वित्त मंत्री संसद पहुंचीं, उसका इतिहास लगभग 400 से 500 वर्ष पुराना माना जाता है। तमिलनाडु के कांचीपुरम क्षेत्र में तैयार होने वाली ये रेशमी साड़ियां केवल वस्त्र नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय बुनकर परंपरा की जीवंत विरासत हैं। कट्टम शैली की खासियत इसकी चौकोर डिज़ाइन और गहरे, सशक्त रंग होते हैं, जो मजबूती और स्थायित्व का प्रतीक माने जाते हैं। बजट जैसे गंभीर अवसर पर इस साड़ी का चयन अपने आप में सांस्कृतिक संदेश बन गया।
बजट 2026-27 : आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़े संकेत
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का मूल उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और आम नागरिक की आकांक्षाओं को केंद्र में रखना है। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ केवल नारा नहीं, बल्कि नीतिगत दिशा है। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि जीडीपी के मुकाबले देश का कर्ज अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वित्तीय अनुशासन का संकेत देता है।
टैक्स और रेमिटेंस में राहत
वित्त मंत्री ने लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और मेडिकल जरूरतों के लिए ली जाने वाली TCS दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा। यह कदम विदेश में पढ़ाई या इलाज कराने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
मेडिकल टूरिज्म और हेल्थ सेक्टर पर फोकस
स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करते हुए सरकार ने भारत को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की घोषणा की। इसके तहत पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा कैंसर समेत गंभीर बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली 17 दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से मुक्त करने का प्रस्ताव भी बजट का अहम हिस्सा रहा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास का इंजन मानते हुए 12.2 लाख करोड़ रुपये के पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रस्ताव रखा गया। इसके साथ ही मुंबई-पुणे, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई, जो भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएंगे।
जलमार्ग, फ्रेट कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स
पर्यावरण-अनुकूल कार्गो मूवमेंट को बढ़ावा देने के लिए पूर्व में डंकुनी से पश्चिम में सूरत तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और अगले पांच वर्षों में 20 नए जलमार्ग शुरू करने की घोषणा की गई। ओडिशा में नेशनल वॉटरवे-5 से इसकी शुरुआत होगी, जिससे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों को बंदरगाहों से जोड़ा जाएगा।
MSME, टेक्सटाइल और सेमीकंडक्टर मिशन
छोटे और मध्यम उद्योगों को भविष्य का चैंपियन बताते हुए 10,000 करोड़ रुपये के MSME ग्रोथ फंड की घोषणा की गई। साथ ही मेगा टेक्सटाइल पार्क, खादी-हथकरघा को मजबूत करने और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च करने का प्रस्ताव बजट की दूरगामी सोच को दर्शाता है।
सादगी, नीति और संदेश—तीनों का संगम
कट्टम कांजीवरम साड़ी में बजट पेश करना केवल व्यक्तिगत फैशन विकल्प नहीं था, बल्कि यह उस नीति-दृष्टि का प्रतीक भी बना, जिसमें परंपरा और आधुनिकता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। जिस तरह बजट में आत्मनिर्भरता, समावेशन और स्थिरता की बात की गई, उसी तरह उनका सादा पहनावा भी विश्व मंच पर भारत की सांस्कृतिक आत्मविश्वास को दर्शाता है।
निष्कर्ष : बजट भी, बुनावट भी—दोनों में संदेश
कट्टम कांजीवरम साड़ी और देश का नौवां बजट—दोनों ने मिलकर यह संकेत दिया कि भारत का विकास केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह सांस्कृतिक निरंतरता, सामाजिक संतुलन और भविष्य की स्पष्ट दृष्टि का भी प्रतिनिधित्व करता है। बजट 2026-27 इसी व्यापक सोच का दस्तावेज़ बनकर सामने आया है।






